Tuesday, March 27, 2018

कामवाली की छुट्टी

सुबह के सात बजे थे। मिसेज चंद्रा चाय की पहली घूँट ले अखबार के पन्ने पलट रही थी। तभी  What's App की आवाज ने तन्द्रा भंग की। वैसे आज मिसेज चंद्रा काफी खुश थी, उनके भैया-भाभी अपने दोनों बच्चो के साथ दोपहर की ट्रैन से दिल्ली आ रहे थे। मिसेज चंद्रा ने काफी सारा प्लान बना रखा था, घूमने का और नए नए तरह के डिश बनाने का, वो भी अपने हाथो से। उन्हें काफी कुछ बनाने का शौख था और नयी नयी डिश सीखा करती थी। 
वो मोबाइल हाथ में ले What's App देखने को हुई, मन में आया शायद भैया का होगा ट्रैन की सुचना देनी होगी या किसी दोस्त की गुड मॉर्निंग वाली मैसेज। जैसे ही पहला मैसेज देखा, तो कामवाली "लल्लो" का था। दिल धरक उठा। शायद देर से आएगी, यह सोचकर उसने मैसेज देखी। 
" मैडम तबीयत अच्छी नहीं, चार दिन छुट्टी पर रहूंगी।"  लल्लो का मैसेज था। 
मिसेज चंद्रा ने गिन कर सात बार ये मैसेज पढ़ा। यही सोच रही थी शायद गलती से किसी और का मैसेज आ गया होगा। जब पूरी तरह विश्वास हो गया तो लल्लो को फोन मिलाया।  फोन उसके पति ने उठाया और बताया लल्लो की तबियत कल रात से खराब है, चार दिन डॉक्टर ने आराम को बोला है। मिसेज चंद्र को काटो तो खून नहीं, ये क्या हो गया, आज ही तबीयत ख़राब होना था। भैया को भी तो चार दिन ही रहना है। किचेन में बर्तन की ढेर लगी है, घर की भी सफाई फिर सबों के लिए खाना बनाना। भाभी वैसे ही नकचढ़ी है, ठीक से स्वागत ना करो तो भैया को ताने देगी। खैर चाय की पहली चुस्की को आखिरी चुस्की बना मिसेज चंद्रा काम में जुट गयी। समझ नहीं आ रहा था कंहा से शुरू करूँ। अभी तो पतिदेव भी नहीं जगे, वैसे भी वो कोई मदद करने से रहे। इसी जद्दोजहद में पतिदेव की आवाज कानों में गूंजी " बेड टी नहीं आयी" । गुस्से में मिसेज चंद्रा कभी किचन को, कभी पति को और कभी घर को देख रही थी। खैर पति को चाय देकर वो काम में जुट गयी। 
पति बेड पर चाय का लुफ्त लेते हुए किचन की बर्तनो की आवाज सुन रहे थे। सोच रहे थे बर्तनो की इतनी तेज आवाज, शायद लल्लो ने आज छुट्टी ले ली है। चाय ख़तम कर वो फिर से बिस्तर पर लेट गए, वैसे भी आज उन्हें ऑफिस देर से जाना है। 
उधर मिसेज चंद्रा मन ही मन खुद को कोस रही थी की कल क्यों घर में भैया-भाभी के आने की चर्चा कर दी। बता बच्चो को रही थी और वो कलमुही बर्तन मांजते कान इधर कर रखी थी। काश कल वो न सुनी होती तो कम से कम मैं पूरा चाय तो पी लेती, अभी तो ये चाय भी करेले का जूस लग रहा। मेरी तो मति मारी गयी थी जो उसके सामने बात की। तभी मोबाइल की घंटी बजी। मिसेज चंद्रा सोचने लगी कौन सुबह सुबह परेशान कर रहा। मोबाइल देखा तो लल्लो का फोन था। गुस्से में फोन उठा एक बार में मिसेज चंद्रा बोल उठी " क्या है, तेरी तबियत को आज ही क्या हो गया"। 
उधर से आवाज आयी , "मैडम जी आज वो मेरी........"
मिसेज चंद्रा ने उसकी बात काटते हुए कहा " क्या हो गया, तेरी तबियत को, चार दिन बाद ख़राब नहीं हो सकती थी। तुम्हारी हर बार की एक ही आदत है, मेरा तो कोई ख्याल नहीं तुम सारे लोग ऐसे ही हो"।
तभी लल्लो ने कहा, "मैडम मेरी बात तो सुनो"। 
मिसेज चंद्रा ने कहा, "क्या सुनूं तुम्हारी बात, हमेशा मेरे साथ ऐसा ही करती हो"। 
"मैडम सुनो तो"  लल्लो ने जोर से कहा  "मैडम मेरी तबियत सचमुच ख़राब है कल रात से बीमार हूँ। मुझे मालूम है आज आपके भैया-भाभी आने वाले हैं, इसीलिए मैं अपनी छोटी बहन को आपके घर भेज रही हूँ यही बताना था। मुझे मालूम है आपके पास काफी काम होगा और आपको मदद की जरूरत है। बस  15 मिनट में वो आपके पास पहुँच जाएगी"।
"क्या सच " मिसेज चंद्रा ने आश्चर्य से कहा। उसे विस्वास नहीं हो रहा था। 
" हाँ मैडम, हम सब एक दूसरे का ख्याल नहीं रखेंगे तो कौन रखेगा। आप भी तो हमारा इतना ख्याल रखती हैं"। लल्लो ने कहा 
मिसेज चंद्रा ने मीठी सी मुस्कान के साथ कहा "तुम कितनी अच्छी हो लल्लो, भगवान करे हर मैडम को तुम्हारे जैसी कामवाली मिले। अपना ख्याल रखना और जल्दी तबियत सही कर के आना। चलो मैं उसके आने का इंतजार कर रही"। 
बात ख़तम करके मिसेज चंद्रा ने अपनी ठंडी चाय की दूसरी घूँट ली, उस ठंडी चाय में भी आज उसे अलग आनंद की अनुभूति हो रही थी।