Thursday, February 8, 2018

कविता - चलो आज थोड़ा लड़ते हैं

चलो आज थोड़ा लड़ते हैं,
कुछ अपनी फिक्र कहते हैं,
कुछ तुम्हारी जिक्र सुनते हैं,
बस थोड़ा तेज ना बोलना,
दिलो के सारे गांठ खोलना,
बार बार ही सही,
सौ दफा ही सही,
गमों के सारे राज खोलना,
कह ना सको अगर कुछ,
पलकों के रास्ते ही बरस्ता,
आंसुओं की न राह रोकना,
गिले शिकवे विराने हो चले,
प्यार मनुहार पुराने हो चले,
आज तो बैठ कर लड़ेंगे,
हर हद पार कर लड़ेंगे,
पर इतना देखो याद रखना,
मेरे हमसफर ये ख्याल रखना,
आज होगी अंतिम लड़ाई,
हर कही-अनकही होगी पराई,
जीवन की इस कश्मकश में,
थोड़ी पुरवाई बहने दो,
कुछ अपनी और तुम्हारी सुनते हैं
चलो आज थोड़ा लड़ते हैं। 

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