Monday, March 4, 2019

हास्य-व्यंग - 26 -27 फ़रबरी 2019, भारत पाकिस्तान में जंग

26 -27  फ़रबरी 2019, भारत पाकिस्तान में हुई जंग पर आधारित   

बहुत हुई जंग भारत पाकिस्तान में।  बहुत सारे लोग हर मुहब्बत में भी जंग ढूंढ़ते रहते हैं। अभी अभी भारत पाकिस्तान में एक मुहब्बत भरी कहानी हुई लेकिन उसमे भी लोग जंग देख रहे। अरे वही, एक सोलह साल की मोहतरमा (F16 ) अपने इक्कीस साल के महबूब (M 21) से मिलने भारत आ गयी वो भी छिपते छिपाते, जान की बाज़ी लगा कर। महबूब ने भी जान की बाज़ी लगा दी उनसे मिलने के लिए। लेकिन कौन समझे, किसे समझाया जाय, सभी को इसमें जंग दिखती है। एक बुरकानशी, पाकिस्तान से हवा में उड़कर अपने भारतीय महबूब से मिलने आती है। एक सोलह साल (F16 ) की आधुनिक ज़माने की कमसिन, नए नए नाजो नखरे से लकदक, हर अदाओ में माहिर, नए नए रंगो रोगन से सजी, इठलाती बलखाती अपने महबूब से मिलने की तड़प में भारत की सीमा में चली आती है  
दूसरी तरफ हमारा इक्कीस साल (M 21) का गबरू जवान जो गठीला, शर्मीला, दिल से हारा, सीधा साधा बैठा अपने महबूबा को याद कर रहा था, प्यार के तराने गा रहा था। देखता है की उसकी महबूबा आसमान में उड़ते हुए उससे मिलने को चली आ रही है। अपने गबरू से यह देखा नहीं गया और वो भी उससे मिलने आसमान में उड़ गया। आज दोनों के बीच सरहद की दिवार ख़त्म हो गयी थी, भला आसमान में कौन सरहद, उड़ते पंछियों का कौन सरहद। सरहद तो जमीन पर बनती है, आसमान में उड़ते मुहब्बत के परवाने कहाँ ये मानने वाले। बस अपना इक्कीस साल का जवान, सोलह साल की नटखट हसीना से आसमान में लुका छिपी खेलने लगा। कभी सरहद के इस तरफ तो कभी सरहद के उस तरफ। जब नाजनीना ने बहुत बेचैन कर दिया तो अपने देसी जवान ने दिल में जलती फुलझरी उनकी तरफ उछाल दी। वो बेचारी इस जवान की शरारत समझ ना सकी और अपने चुन्नट में आग लगा बैठी और अपने वतन लौट गयी। अपना जवान कुछ समझ पाता, कुछ समझा पाता तब तक देर हो चुकी थी। इससे पहले की वो वापस लौटे, खुद को महबूबा की धरती पर पाया वो भी सैकड़ो लोगो से घिरा। अब बात दो देश की हो चुकी थी , मुहब्बत पीछे छूट चूकी थी, राजनीती शुरू हो चुकी थी। इन सब के बीच सोलह और इक्कीस की मुहब्बत की कहानी मीडिया में छाने लगी। पाकिस्तान ने कहना शुरू किया कि हमारी नए ज़माने की आधुनिक बाला को भारत के पुराने ज़माने के देसी छोड़े ने छेरने की जुर्रत कैसे की, बस अब मामला सियासी बन चूका था। उधर सोलह अपने चुन्नट में लगी आग से बुरी तरह जल चुकी थी और अस्पताल में आखिरी सांसे गिन रही थी, उसने अपनी भाभी को पैगाम भिजवाया  कि मेरे महबूब को वतन वापसी करवा दो और कसम दिलवाई की उसे छोरने तुम ही सरहद की सीमा तक जाना। भाभी लग गयी अपने ननद के मुहब्बत को बचाने में, पूरा जोर लगा दी दोनों प्रधान मंत्री को मिलाने में। अंत में मुहब्बत जीती और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को संसद में घोषणा करनी पड़ी की इस गबरू जवान को तुरंत छोरा जाय। तब तक सालियों को सबकुछ पता लग चूका था, बस उसने इस गबरू के जूते चुरा लिए। अपना छोरा भी सब कुछ समझ कर मंद मंद मुस्काने लगा और भाभी को देखने लगा। भाभी ने धीरे से समझाया कि जहाँ इतनी देर , वहीं कुछ घंटे और सही फिर नए जुते की व्यबस्था की और सरहद की सीमा तक छोरने खुद आयी।
जब अपना जवान वापस आया तो मालूम हुआ की जिस फुलझरी से महबूबा के चुन्नट में आग लगी थी, उससे वह पूरी तरह जल चुकी थी और सुपुर्दे ख़ाक हो चुकी है। गबरू के आँखों में आंसू आ गए और मन ही मन सोचा की मैं दिल में महबूबा की यादो को लिए, अपने महबूबा की जमीं को आसमान से देखने फिर जरूर जाऊंगा।
अब इतनी मुहब्बत भरी दास्ताँ को जंग का नाम कैसे दे दिया जाये।








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