Monday, May 6, 2019

अधजला इश्क - कविता

 "अधजला इश्क"

क्या करूं ले इश्क तेरा 
इस उम्र में ऐ प्रियवर
इश्क अब किस्से कहानी
जिंदगी के इस मोड़ पर

अब न चाहत पहले जैसी
अब न हिम्मत सोचने की
ख्वाहिशें कब खो चुकी हैं
सपने भी सब सो चुकी हैं
बरस चुकी हैं बादलें भी
धूल चूका सावन सोलंहवा

पूछा, जाना और माना था तब
साथ चलने का इरादा था तब
पर तुम्हारे सोच में न हम
मेरे इश्क में जायका था कम
तब तुम्हारे सुर सुरीले
मुझमे थे हर रंग फीके

अब कहाँ वो गीत प्यारे
टूटे हैं अल्फ़ाज़ सारे

जिंदगी के जद्दोजहद में 
दब चुके जज्बात हमदम
ढल चुकी तरुणाई सारी
मिट चुकी तन्हाई सारी

साथ ना अब चल सकेंगे
गीत न हम गा सकेंगे
मिल न पाऊँ ऐसा शायद
तुझको तेरा मीत मुबारक
दर्दे गम अब दोस्त मेरे
अधजला इश्क मेरे हिस्से


क्या करूंगा इश्क लेकर
इस उम्र में ऐ प्रियवर
इश्क अब किस्से कहानी
जिंदगी के इस मोड़ पर

                   - अभय सुमन "दर्पण"











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