सीन -१ (२ मिनट )
पार्क का सीन
एक लड़का और एक लड़की पार्क के बेंच पर बैठे है
लड़का - पूजा। I MISS YOU
लड़की - हाँ sonu। I ALSO MISS YOU
लड़का - बस आज का दिन और हम कल जुड़ा हो जायेंगे।
लड़की - लेकिन मैं आउंगी , तुमसे मिलने, अपने प्यार से मिलने।
लड़का - हाँ , बस कुछ सालो की बात है। मैं इंजीनियरिंग पढ़ने बंगलोर जा रहा लेकिन आऊंगा और तुम्हे अपना बनाऊंगा। मेरा इंतजार करना, करोगी ना ?
लड़की - मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ , वो समय भी आएगा जब मैं सिर्फ तुम्हारी बनूँगी , सदा सदा के लिए . लव यू sonu। ये मेरा वादा है
लड़का - लव यू टू ।
लड़का - लव यू टू ।
दोनों अपना हाथ एक दूसरे के उपर रखते हैं
सींन - २ (३ मिनट)
एक कमरे में पंडित जी कुछ ढूंढ रहे हैं तभी एक किताब गिर जाती है , उसमे एक फोटो होती हैं। पंडित जी देखते जाते हैं और गुस्से में चेहरा लाल होता जाता है। फिर चिल्लाते हैं
पंडित जी - पूजा...
दूसरे कमरे से लड़की आती है - जी बाबू जी।
पंडित जी - ये क्या है (फोटो दिखाते हैं ), तुम सोनू से मुहब्बत करती हो ?
पूजा (शर्माते हुए) - जी बाबूजी (आँचल मुँह मे दबा कर)
पंडित जी - तुम्हे मालूम है न वो कायस्थ है। एक पंडित की बेटी कायस्थ के घर की बहु बनेगी। चार लोग क्या कहेंगे।
पूजा - बाबूजी , मैं उन चार लोगो को देखुंं या अपनी खुशी।
पंडित जी - जुबान लड़ाती है, जल्द ही तेरी शादी किसी पंडित के बेटे से करता हूँ , अगर नहीं मानी तो मेरा मरा मुँह देखेगी।
पूजा - (रोते हुए ) - बाबूजी
background में किसी शादी की धूंधली विडिओ चल रही है और शहनाई की आवाज आ रही।
सीन - ३ (३ मिनट)
सुहागरात का सीन
एक बेड सजी है और दुल्हन बैठी है , एक पंडित टाइप का लड़का बेड के चारो तरफ घूम रहा और मंत्र पढ़ रहा और भुनभुना रहा , लड़की सोच रही , " ये कब आ कर मेरा घूँघट हटाएगा , एक घंटे से पता नहीं क्या पढ़ रहा।
तभी पंडित बोलता है , " हो गयी सिद्धि , अब मुझे जरूर पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। लेकिन मुहूर्त तो सुबह ३ बजे का निकला है , तब तक नीचे बैठ कर इंतज़ार करता हूँ।"
लाइट डिम हो जाती है. फिर घडी तीन बजती है। वो उठ कर बेड पर जाता है तो देखता है दुल्हन सो चुकी है। वो उसे जगाता है लेकिन वो सोइ रहती है। वो सर पकड़ कर बैठ जाता है और बोलता है , अरे सुबह मुहूर्त निकलती जा रही, अब क्या होगा। (रुआंसा हो जाता है )
सीन ४ (२ मिनट)
पंडित पति - अरी ओ पंडिताइन , दरवाजा खोलो।
(पूजा दरवाजा खोलती है )
पंडित जी - देखो तो पंडिताइन , आज कितना चढ़ावा मिला है। चावल, दाल , दक्षिणा और ये साडी , हाँ तीन चार सौ की तो होगी ही।
(पूजा मुँह बनाते हुए अंदर आती है ) पंडित जी साडी लेकर उसके सर पर रखते है और कहते हैं , आज इसी साडी से तुम्हारा श्रृंगार करूंगा।
पूजा सोचने लग जाती है - ( इन चार लोगो के चक्कर में बाबूजी ने कहाँ मेरी शादी करा दी। अगर इन चार अनदेखे लोगो का ख्याल नहीं करते तो मेरा पति कोई और होता और मैं अपने पिया की सजनी होती )
मुँह बनाती है - हूँह
सीन - ४ (२ मिनट)
टिंग - टोंग, दरवाजा खुलता है
पंडित जी (पिता जी ) आते हैं और पूछते हैं। कैसी हो
पूजा - ठीक हूँ , आप ही का दिया प्रसाद खा रही हूँ।
पंडित जी - मेरा दिया प्रसाद , क्या मतलब
पूजा -छोड़िये जाने दीजिये , मैं चाय बनती हूँ (उठ कर जाती है )
फिर कमरे में आते हुए। ... एक ट्रे में चाय और चार लड्डू हैं , चारो लड्डू अलग अलग तरह के हैं।
पंडित जी - ये चारो लड्डू अलग -अलग तरह के , लगता है पतिदेव काफी ख्याल रखते हैं।
पूजा - किस बात का ख्याल , ये चारो लड्डू चार यजमान के घर के हैं। पूजा पाठ कर के चढ़ावे वाले। आपने चार लोगो के चक्कर में कंहा मुझे फंसा दिया। मेरे मुताबिक शादी हुई होती तो मैं भी खुश रहती।
पंडित जी - हाँ बेटा , गलती हो गयी। ये चार लोग क्या कहेंगे के विषय में न सोचा होता तो कम से कम एक ही तरह के लड्डू खा रहा होता। लड़का दूसरी जाति का था तो क्या हुआ, तू तो खुश रहती।
पूजा - हाँ बाबूजी (कहकर गले लग जाती है )
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