Tuesday, December 10, 2019

कहानी - पापा बेटी

ट्रिंग - टिंग।
तीन बार फ़ोन बज चुकी थी, लेकिन किसी ने उठाया नहीं।  प्रिया ने धड़कते दिल से फिर एक बार फ़ोन मिलाया।  इस बार फ़ोन उठ गयी।
"हैलो",  उधर से बलबीर सिंह की आवाज आयी।
प्रिया ने जब अपने पापा की आवाज सुनी तो एक सिहरन सी पुरे शरीर में फैल गई।  उसे जबाब देने की हिम्मत नही हो रही थी। वो स्तब्ध सी फ़ोन पर अपने पापा की आवाज सुन रही थी।
" हैलो, हैलो", कई बार बलबीर सिंह ने कहा , "पता नहीं कौन है जवाब ही नहीं दे रहा " फिर फ़ोन को रख दिया।
इस बार प्रिया ने फिर हिम्मत की और फोन मिलाई।  फिर फ़ोन उसके पापा ने उठाया, "हैलो ", लेकिन फिर उधर से कोई आवाज नहीं आयी।  फिर वो जोर से चिल्लाया "पता नहीं कौन है , बार बार फोन कर परेशान कर रहा।
"पापा मैं, प्रिया " , प्रिया बोल बैठी
"कौन प्रिया , मैं किसी प्रिया को नहीं जानता " बलबीर ने कहा
"पापा मैं आपकी बेटी, प्रिया ", प्रिया ने कहा
"कौन बेटी, मर चुकी मेरी बेटी, दुबारा फ़ोन मत करना", बलबीर ने कहा और फ़ोन रख दिया।
प्रिया ने फिर फ़ोन मिलाया, बलबीर ने सोचते हुए फ़ोन उठाया।
"पापा प्लीज फ़ोन मत रखना ", प्रिया ने कहा, "मुझे माफ़ कर दो पापा "
"माफ़ कर दूँ , पर किस लिए, जब तुम मेरी बेटी ही नहीं " बलबीर ने कहा
"नहीं पापा ऐसा मत कहो, काफी हिम्मत जुटा कर आपसे बात कर रही हूँ , मुझे माफ़ कर दो ", प्रिया ने कहा
"कैसे माफ़ कर दूँ , अच्छा बता कैसे माफ़ कर दूँ।  जीते जी तुमने मुझे मार दिया , तेरी माँ ने पिछले तीन सालो से मौन धारण कर रखा।  मैंने पुरे समाज से नाता तोड़ लिया ", बलबीर ने कहा
"सॉरी पापा " , प्रिया ने कहा
"ना ही तेरे से बात करनी और ना ही तेरी शक्ल देखनी", बलबीर ने कहा
"ठीक है पापा, मेरी शक्ल न देखो, लेकिन पीहू की तो देख लो, मेरी बेटी एक साल की होने वाली है", प्रिया ने कहा
" अच्छा एक साल की होने वाली है, कैसी दिखती है , तेरे जैसी ही ना ", बलबीर ने भावुक होकर कहा।
"हाँ पापा, बिलकुल मेरे जैसी", प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा
"उसके जन्म के समय बहुत मन किया था, तुमसे मिलने का, लेकिन ... ," बलबीर ने आंसू पोछे
"पापा बहुत मिस करती मैं आपको", प्रिया ने कहा
"तो तूने ही तो ऐसा काम किया। भाग कर शादी करने की क्या जरूरत थी ?", बलबीर ने कहा
"पापा उसे बहुत चाहती थी मैं ", प्रिया ने कहा
 "अच्छा कितने साल से तू उसे जानती थी ", बलबीर ने पूछा
"पापा, दो साल से " प्रिया ने कहा
"और... और मेरा क्या, जिसने चौबीस साल तुझे अपनी आँखों के सामने बड़ा होते देखा। मेरे प्यार का कोई मूल्य नहीं। इतनी सी थी तू , गोद में लेकर कितना खेलता था। मेरी हर मुस्कान की वजह तुम थी, एक झटके में सब तोड़ दिया।" बलबीर ने कहा
"पापा ऐसा मत बोलिये, बहुत प्यार करती हूँ आपसे।  लेकिन मजबूर थी मैं ", प्रिया ने कहा

" और मेरी मजबूरी कुछ नहीं, सोचा नहीं मेरा कुछ भी।  मेरा मान , सम्मान , बरसो की कमाई प्रतिष्ठा।  बस भाग गई घर छोड़ के। रातो रात।  अरे बताया तो होता एक बार। " बलबीर ने कहा
" I am sorry papa, माफ़ कर दो मुझे, मैं बहुत शर्मिंदा हूँ", प्रिया ने कहा,
"जाने दे बेटा,बस थोड़ा ख्याल रखी होती मेरा,कितने सपने सजाये थे तेरे ब्याह के, कितने अरमान थे मेरे, खैर।
बलबीर ने कहा।
"मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी पापा " , प्रिया ने कहा
"ना बेटा ना, ऐसा नहीं बोलते, तू तो मेरी सबसे अच्छी बेटी है। गलती मेरी ही थी, मेरी परवरिश में कुछ कमी रह गयी होगी। अपनी बेटी को संस्कार देने में कभी कमी न करना। ध्यान रखना की कभी वो तुझे बिना बताये घर न छोर दे। मैं नहीं चाहता की जो दुःख मैंने झेला, तुझे भी झेलनी पड़े। " बलबीर ने यह कह कर फ़ोन रख दिया।

                                                                              - अभय सुमन "दर्पण"


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