Friday, September 13, 2019

कहानी - दो भाई

बड़े भाई बाहर बैठ कर कान में ऊँगली कर रहा था। तभी छोटा भाई आता है।
छोटा - भैया मुझे 2000  रूपये की जरूरत है।
बड़ा - अभी पिछले हफ्ते ही तो हजार रूपये दिए थे।
छोटा - वो तो ख़त्म हो गए।
बड़ा - (गुस्से में ) - ख़त्म हो गए , ऐसे कैसे ख़त्म हो गए।
छोटा - अरे।  हो गए तो हो गए।  मुझे तो चाहिए 2000 रूपये।
बड़ा - नहीं है मेरे पास जा।
छोटा - कोई बात नहीं , भाभी से ले लूँगा।
बड़ा - उसके पास भी नहीं है।
छोटा - (नाराजगी में ) - पापा के गुजरने के बाद तुम मेरा बिलकुल ध्यान नहीं रखते।
बड़ा - अरे, अरे।  ऐसा नहीं बोलते , तू तो मेरी जान है।
छोटा - नहीं नहीं , तुम बदल गए हो।  भाभी के लिए तो हर महीने साडी लाते हो और मेरे लिए कुछ नहीं।
बड़ा -  मुझे तेरी बकवास नहीं सुननी।  तुझे जो सोचना है सोच, मैं चला ऑफिस।
                           (उठकर चला जाता है )

शाम में बड़ा भाई ऑफिस से आता है। अंदर से लेडिज की आवाज आती है।

लेडीज - कपड़े बदलने के पहले भाई को बुला लाओ।  पार्क में बैठा है सुबह से , बिना कुछ खाये पिए।
बड़ा - तो तुमने बुलाया क्यों नहीं।
लेडीज- एक बार कहा था, लेकिन मेरी सुनता कहाँ है।
बड़ा - एक बार (बुदबुदाते हुए ). अच्छा अगर तुम्हारी बहन बिना कुछ खाये पिए दिन भर रहती तो क्या तुम ऐसे ही छोर देते।
लेडीज -देखो जी।  अब इन मामलो में मेरे मायके को मत घसीटो।  लाखो में एक है मेरी बहन।
बड़ा - ठीक है, मैं ही जाता हूँ।

पार्क में छोटा बैठा है।  बड़ा आता है और कंधे पर हाथ रखता है। छोटा हाथ हटा देता है।

बड़ा - सुना है तुमने पुरे दिन कुछ खाया - पिया नहीं।
छोटा - तुम्हे इससे क्या मतलब
बड़ा - अच्छा।  मुझे कोई मतलब नहीं।  मैं कोई नहीं।
छोटा - नहीं, कोई नहीं है मेरा।
बड़ा - अभी दूंगा एक लपारा।  ऐसे कोई करता है क्या। मैं तो तेरे अच्छे के लिए कहता हूँ, तू कुछ बन जायेगा तो सबसे ज्यादा खुश मैं ही होऊंगा।
छोटा - तुम क्यों खुस होंगे, बंधे रहो भाभी के पल्लू से।
बड़ा - (मुस्कुराते हुए) तो ये बात है , देख छोटे जिम्मेदारियां बढ़ने से तेरे प्रति प्यार थोड़े न काम हो जायेगा। तू तो आज भी मेरा वही छोटा सा टुल्लू है।  और तूने पुरे दिन कुछ खाया क्यों नहीं।
छोटा - बस भैया, खुद को काफी अकेला महसूस कर रहा था।  लग रहा था जिंदगी में कुछ बन नहीं पाउँगा और मेरा कोई नहीं।
बड़े - बस इतनी सी बात।  अरे , हरेक के जीवन में ऐसा मोड़ आता है।  बस घबराना मत।  और मैं तो हूँ तेरे साथ।
छोटा - आज मुझे मम्मी पापा की बहुत याद आ रही थी।
बड़ा - और मैं
छोटा - तुम पर गुस्सा
बड़ा - कोई बात नहीं , हक़ है तेरा।  लेकिन मुझे तुम पर प्यार आ रहा। याद है, स्कूल में टीचर के पिटाई के डर से कैसे तू भाग कर मेरे क्लास में आकर मेरे पीछे छिप गया था।  भरोसा कर के ही ना। और पूजा, जब वो छोड़ कर तुझे चली गयी थी, कितना रोया था मुझसे लिपट कर।
छोटा - देखो अब पूजा की याद मत दिलाओ
बड़ा - हा, हा , हा , देख छोटे , कल को मेरी फैमिली बढ़ेगी, फिर तेरी फॅमिली बढ़ेगी , तो क्या हम दोनों का प्यार कम हो जायेगा। होने भी मत देना।  है ना।
छोटा - नहीं भैया , हम दोनों का प्यार कभी कम नहीं होगा।
                      (दोनों गले लग जाते हैं)

                                                                                -    अभय सुमन " दर्पण"



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