Sunday, January 5, 2020

बीस की जवानी
चालीस की रवानी
साठ का सियापा
अस्सी का बुढापा
सौ की गिनती
20-20 चढती
इस 2020 में
अपनी उम्र ढूंढें
कितना खोया-पाया
इस जीवन की बूंदे
मां-बाप की गोद या
भाई-बहन को मिस
लंगोटिया यार या
पहले प्यार की टीस
कालेज कैंपस मे
कट वाली चाय
कुछ गलियां,चौराहे
तो कुछ खोये ख्वाब
नववर्ष 2020 में
हैं जीवन के दो हिस्से
एक है अंधी दौर और
कुछ पुराने किस्से
कुछ 20 अगर इसे देना
तो कुछ 20 उसे देना
कुछ दुनियादारी कर लेना
कुछ मन की भी सुन लेना।


अभय सुमन "दर्पण"

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