Sunday, January 26, 2020

कविता - हम भगवान के बन्दे हैं

हम भगवान के बन्दे हैं   
अल्लाह के बन्दे हैं 
करने दो उन्हें सियासत
जिनके ये धंधे हैं 

वो राम भी अपनी है 
वो श्याम भी अपनी हैं 
ख्वाजा भी अपने हैं 
नानक हमारा है 

दिल्ली भी प्यारा है 
लाहौर हमारा था 
तक्षशिला है अपनी 
ढ़ाका भी न्यारा है 

बांटा जो तुमने सरहद 
लाखो लाशे थी बिखरी
पूछा तुमने हमसे क्या 
जो लहू से सींची थी  

थी एक ही अपनी मिट्टी 
है एक ही अपनी संस्कृति 
क्यूँ बाँट दिया ये धरती 
जो इतिहास पुराना  है 

हम भगवान के बन्दे हैं
अल्लाह के बन्दे हैं 
करने दो उन्हें सियासत
जिनके ये धंधे हैं 

पायी थी तुमने गद्दी 
नेहरू-जिन्ना थे राजा 
पहना था जो गले में 
मुंडो की माला थी 

सन सैतालिस का मंजर 
खून के प्यासे दोनों 
फैलाया जो जहर था 
वो आज भी जिन्दा है 

बजती मंदिर की घंटी 
अजान की तान से जगते
गुरुबाणी है अमृत 
चर्च के घंटे हैं 

ऐसा देश है अपना 
छोरो मरना और लड़ना 
एक ही खून है हममें 
क्या पंडित क्या मौला 

हम भगवान के बन्दे हैं
अल्लाह के बन्दे हैं 
करने दो उन्हें सियासत
जिनके ये धंधे हैं 










































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