याद आते हैं वो बचपन के दिन,
भटके जब मेरा युवा मन,
क्या उमंग के दिन थे वो,
अल्हड़,चंचल,निश्छल ,निर्दोष
सतरंगी कल्पना में खोये हुए,
लड़ते झगड़ते रूठते मानते हुए,
मम्मी की वो मोहक मधुर बातें,
कर देती पापा का गुस्सा कम,
सोती रातों में नानी दादी संग,
सुनना उनसे कहानी था एक राजा-रंक,
क्या परी क्या शहजादी,
लगती सब अपनी सारी,
हाँ बचपन का भोला मन,
देखा जिंदगी का दर्पण,
क्या भूलू क्या याद करूँ,
क्या वह दिन वापस आएगा,
मुझे बचपन में ले जायेगा,
याद आते हैं वो बचपन के दिन,
भटके जब मेरा युवा मन।
भटके जब मेरा युवा मन,
क्या उमंग के दिन थे वो,
अल्हड़,चंचल,निश्छल ,निर्दोष
सतरंगी कल्पना में खोये हुए,
लड़ते झगड़ते रूठते मानते हुए,
मम्मी की वो मोहक मधुर बातें,
कर देती पापा का गुस्सा कम,
सोती रातों में नानी दादी संग,
सुनना उनसे कहानी था एक राजा-रंक,
क्या परी क्या शहजादी,
लगती सब अपनी सारी,
हाँ बचपन का भोला मन,
देखा जिंदगी का दर्पण,
क्या भूलू क्या याद करूँ,
क्या वह दिन वापस आएगा,
मुझे बचपन में ले जायेगा,
याद आते हैं वो बचपन के दिन,
भटके जब मेरा युवा मन।
(अगर अच्छी लगे तो follow करें एवं कमेंट लिखें। धन्यवाद )
Bahut Sundar.
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