Monday, July 24, 2017

कविता - हौले हौले धीरे धीरे ठुमक ठुमक के चलत दुल्हनियाँ

हौले हौले धीरे धीरे
ठुमक ठुमक के
चलत दुल्हनियाँ

साजन मोरा पल्लू ना छोरे
ननदी मोरा पीछा ना छोरे
जान की आफत
आ  परी रे
क्या करे तू
अब रे दुल्हनियाँ

साजन करते जोरा - जोरी
देवर देखे आँखिया मींचे
हाय मुसीबत
आ गयी रे
कँहा फंसी है
तू रे दुल्हनियाँ

हौले हौले धीरे धीरे
ठुमक ठुमक के
चलत दुल्हनियाँ 

साजन बोले मीठी बतिया
ससुरा ताना धीरे से मारे
कैसी उलझन
आन परी है
समझ न आये
हाय दुल्हनियाँ

साजन मोरा फ़िल्म दिखाये
सासु मोरा साथ में जाये
शरम के मारे
कुछ ना बोले
कौन बचाये
तुझको दुल्हनियाँ

साजन मोरा कोठ्ठे पे बुलाये
भैंसुर मोरा दरबज्जे से न जाये
कैसे जाऊँ
साजन से मिलने
कोई जतन तू
लगा दुल्हनियाँ

हौले हौले धीरे धीरे
ठुमक ठुमक के
चलत दुल्हनियाँ




                                                                                                      (अगर अच्छी लगे तो follow करें एवं कमेंट लिखें। धन्यवाद )





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