आज फिर सिंह साहेब चौराहे पर खड़े थे हाथो में 4 -5 हेलमेट लेकर। रोज
की तरह वही उलझी बाल, थकी नजरे, पुराने से कपड़े पहने, अपनी उसी जगह पर
चौराहे के नजदीक। तभी उन्हें एक 16 -17 साल का लड़का बाइक से आता दिखा बिना
हेलमेट लगाए। सिंह साहेब ने आवाज देकर उसे रोका और पूछा।
"बेटा, बिना हेलमेट के जा रहे, ये लो हेलमेट मेरी तरफ से लगा लो", सिंह साहेब
"नहीं नहीं अंकल, मेरे पास है लेकिन घर पे है " लड़का ने कहा
"तो लगाया क्यों नहीं", सिंह साहेब
"बिना हेलमेट काफी मज़ा आता है, खुली हवा में बालो का लहराना, लड़कियों का देखना। अरे अंकल हेलमेट पहन कर वो बात कहाँ।", लड़के ने हँसते हुए कहा
"बात तो ठीक कह रहे, लेकिन जिंदगी भी तो उस सबसे ज्यादा जरूरी है।" सिंह साहेब ने सोचते हुए कहा
"अरे अंकल जाने दो देर हो रही, लेकिन एक बात बताओ ", लड़का
"क्या "
"आप ऐसे फ्री में हेलमेट क्यों बाँट रहे", लड़का
"क्योंकि मैं तुम जैसे लड़को से बहुत प्यार करता हूँ " सिंह साहेब
"क्यों मजाक कर रहे अंकल, मेरे मम्मी पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं ", लड़का
"बेटा अगर वो प्यार कर रहे होते तो बिना हेलमेट तुम्हे घर से निकलने नहीं देते" सिंह साहेब
"अरे अंकल कैसी बाते कर रहे, तुम शायद कोई पागल जान परते हो।" कहकर लड़का बाइक आगे बढ़ा देता है
पास में खडे दो लड़के बाते कर रहे थे।
"कौन है ये आदमी, अक्सर देखता हूँ यहाँ खडा रहता है और लोगो को हेलमेट बांटता रहता है ", पहले ने कहा
"पता नहीं कौन है, पर मुझे भी अक्सर दिखता है, होगा कोई पागल। कोई अपने पैसे इस तरह लुटाता है क्या " दूसरे ने कहा
पास में खड़ा एक आदमी उनकी बात सुन रहा था , वो पास आकर कहता है "क्या तुम इन्हे नहीं जानते, ये मिस्टर दिनेश सिंह हैं, शहर के जाने माने रईस थे, अपनी आधी से ज्यादा सम्पति ईन्होंने दान कर दी, आज कल हर दिन शाम में किसी भी चौराहे पर खडे हो कर हेलमेट बांटते हैं, खासकर जो युवा बिना हेलमेट के जाते हैं उसे रोक कर।"
"लेकिन ऐसा क्यों" , पहले ने पूछा
फिर वो कहानी सुनाने लगता है।
"ज्यादा नहीं बस एक साल पहले की बात है, एक दिन अपने घर पर वो बैठे थे......
साथ में उनका कोई जूनियर भी बैठा था, तभी उनका 16 -17 साल का लड़का कमरे से निकल रहा थ।
"पापा मैं जरा दोस्तों के साथ नई बाइक से घूम कर आ रहा", बेटे ने कहा
"अरे, इतनी जल्दी भी क्या है, आओ मेरे पास बैठो।" सिंह साहेब
"नहीं पापा, सभी दोस्तों को पार्टी देनी है, आज तो बहुत मजा आने वाला है " बेटा
"जा बेटा, लेकिन ध्यान से। पैसे की जरूरत हो तो एटीएम से निकल लेना, और हाँ हेलमेट लगा लेना" ,सिंह साहेब
"अरे पापा, हेलमेट तो बोझ लगती है सर पे, फिर कहाँ वो मस्ती हो पायेगी ", बेटा
"ठीक है जा, लेकिन संभाल के", सिंह साहेब
बेटा निकल जाता है। तभी उनका जूनियर कहता है।
"सर, इनकी उम्र क्या है," जूनियर
"अभी सोलह पूरा कर के सत्रह लगा है, हीरो है पुरे स्कूल का" सिंह साहेब ने गर्व से कहा
"पर सर, इतनी काम उम्र में बाइक दिलाना......., बिना हेलमेट बाइक चलना....... ", जूनियर ने हिचकते हुए कहा
हाँ तो क्या हुआ, खुली हवा में बाले लहरायेंगे, लड़किया देखेगी। हा हा हा , अरे भाई यही तो उम्र है जिंदगी जीने का, तुम परेशांन मत हो।", सिंह साहेब
"पर सर, आजकल तो फाइन भी काफी बढ़ गयी है", जूनियर
"देखो मिश्रा कर दी न छोटी बात, सिंह साहेब का बेटा है, हजार क्या, लाखो में भी फाइन चला जाये तो दूंगा, आखिर कमाता किस लिए हूँ।", सिंह साहेब
"जी सर ", जूनियर ने कहा और शांत हो गया
सिंह साहेब ने चाय की एक कप उठाई ही थी कि तभी फ़ोन की घंटी बजी। उधर से आवाज आयी।
"हेलो, सिंह साहेब है", उधर से आवाज
"हाँ , बोल रहा हूँ " सिंह साहेब
"सर, आपके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है, सर फ्रैक्चर हो गया है, हेलमेट नहीं लगा रखा था,ऑन द स्पॉट डेथ हो गयी है ," उधर से आवाज आयी
सिंह साहेब के हाथ से फोन गिर गया।
फिर आगे बताने लगा
...... बस उसी दिन के बाद इनका जैसे सब ख़तम हो गया, इकलौता लड़का था, अगर हेलमेट लगायी होती तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती।", उस आदमी ने अपनी बात पूरी की। (पीछे सिंह साहेब की धुंधली तस्वीर दिख रही, जिसमे वो लोगो को हेलमेट दे रहे होते हैं।)
वो दोनों लड़के सिंह साहेब के पास जाते हैं और उनके साथ लोगो को हेलमेट देने में मदद करते हैं।
"बेटा, बिना हेलमेट के जा रहे, ये लो हेलमेट मेरी तरफ से लगा लो", सिंह साहेब
"नहीं नहीं अंकल, मेरे पास है लेकिन घर पे है " लड़का ने कहा
"तो लगाया क्यों नहीं", सिंह साहेब
"बिना हेलमेट काफी मज़ा आता है, खुली हवा में बालो का लहराना, लड़कियों का देखना। अरे अंकल हेलमेट पहन कर वो बात कहाँ।", लड़के ने हँसते हुए कहा
"बात तो ठीक कह रहे, लेकिन जिंदगी भी तो उस सबसे ज्यादा जरूरी है।" सिंह साहेब ने सोचते हुए कहा
"अरे अंकल जाने दो देर हो रही, लेकिन एक बात बताओ ", लड़का
"क्या "
"आप ऐसे फ्री में हेलमेट क्यों बाँट रहे", लड़का
"क्योंकि मैं तुम जैसे लड़को से बहुत प्यार करता हूँ " सिंह साहेब
"क्यों मजाक कर रहे अंकल, मेरे मम्मी पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं ", लड़का
"बेटा अगर वो प्यार कर रहे होते तो बिना हेलमेट तुम्हे घर से निकलने नहीं देते" सिंह साहेब
"अरे अंकल कैसी बाते कर रहे, तुम शायद कोई पागल जान परते हो।" कहकर लड़का बाइक आगे बढ़ा देता है
पास में खडे दो लड़के बाते कर रहे थे।
"कौन है ये आदमी, अक्सर देखता हूँ यहाँ खडा रहता है और लोगो को हेलमेट बांटता रहता है ", पहले ने कहा
"पता नहीं कौन है, पर मुझे भी अक्सर दिखता है, होगा कोई पागल। कोई अपने पैसे इस तरह लुटाता है क्या " दूसरे ने कहा
पास में खड़ा एक आदमी उनकी बात सुन रहा था , वो पास आकर कहता है "क्या तुम इन्हे नहीं जानते, ये मिस्टर दिनेश सिंह हैं, शहर के जाने माने रईस थे, अपनी आधी से ज्यादा सम्पति ईन्होंने दान कर दी, आज कल हर दिन शाम में किसी भी चौराहे पर खडे हो कर हेलमेट बांटते हैं, खासकर जो युवा बिना हेलमेट के जाते हैं उसे रोक कर।"
"लेकिन ऐसा क्यों" , पहले ने पूछा
फिर वो कहानी सुनाने लगता है।
"ज्यादा नहीं बस एक साल पहले की बात है, एक दिन अपने घर पर वो बैठे थे......
साथ में उनका कोई जूनियर भी बैठा था, तभी उनका 16 -17 साल का लड़का कमरे से निकल रहा थ।
"पापा मैं जरा दोस्तों के साथ नई बाइक से घूम कर आ रहा", बेटे ने कहा
"अरे, इतनी जल्दी भी क्या है, आओ मेरे पास बैठो।" सिंह साहेब
"नहीं पापा, सभी दोस्तों को पार्टी देनी है, आज तो बहुत मजा आने वाला है " बेटा
"जा बेटा, लेकिन ध्यान से। पैसे की जरूरत हो तो एटीएम से निकल लेना, और हाँ हेलमेट लगा लेना" ,सिंह साहेब
"अरे पापा, हेलमेट तो बोझ लगती है सर पे, फिर कहाँ वो मस्ती हो पायेगी ", बेटा
"ठीक है जा, लेकिन संभाल के", सिंह साहेब
बेटा निकल जाता है। तभी उनका जूनियर कहता है।
"सर, इनकी उम्र क्या है," जूनियर
"अभी सोलह पूरा कर के सत्रह लगा है, हीरो है पुरे स्कूल का" सिंह साहेब ने गर्व से कहा
"पर सर, इतनी काम उम्र में बाइक दिलाना......., बिना हेलमेट बाइक चलना....... ", जूनियर ने हिचकते हुए कहा
हाँ तो क्या हुआ, खुली हवा में बाले लहरायेंगे, लड़किया देखेगी। हा हा हा , अरे भाई यही तो उम्र है जिंदगी जीने का, तुम परेशांन मत हो।", सिंह साहेब
"पर सर, आजकल तो फाइन भी काफी बढ़ गयी है", जूनियर
"देखो मिश्रा कर दी न छोटी बात, सिंह साहेब का बेटा है, हजार क्या, लाखो में भी फाइन चला जाये तो दूंगा, आखिर कमाता किस लिए हूँ।", सिंह साहेब
"जी सर ", जूनियर ने कहा और शांत हो गया
सिंह साहेब ने चाय की एक कप उठाई ही थी कि तभी फ़ोन की घंटी बजी। उधर से आवाज आयी।
"हेलो, सिंह साहेब है", उधर से आवाज
"हाँ , बोल रहा हूँ " सिंह साहेब
"सर, आपके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है, सर फ्रैक्चर हो गया है, हेलमेट नहीं लगा रखा था,ऑन द स्पॉट डेथ हो गयी है ," उधर से आवाज आयी
सिंह साहेब के हाथ से फोन गिर गया।
फिर आगे बताने लगा
...... बस उसी दिन के बाद इनका जैसे सब ख़तम हो गया, इकलौता लड़का था, अगर हेलमेट लगायी होती तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती।", उस आदमी ने अपनी बात पूरी की। (पीछे सिंह साहेब की धुंधली तस्वीर दिख रही, जिसमे वो लोगो को हेलमेट दे रहे होते हैं।)
वो दोनों लड़के सिंह साहेब के पास जाते हैं और उनके साथ लोगो को हेलमेट देने में मदद करते हैं।


